Human Rights Violations – Victims of Asaram Bapu from Newspapers & TV clippings & Real court documents www.SlaveCult.com

November 9, 2008

रंडी या तवायफ के कोठे और आसाराम बापू के आश्रमो में सारी समानताएँ है!

रंडी या तवायफ के कोठे और आसाराम बापू के आश्रमो में सारी समानताएँ है!

दोनो जगह काम करने वाले कर्मचारियों को वेतन के नाम पर ठेंगा मिलता है

दोनो जगह कर्मचारियों के घर वालों को पता नहीं होता की उनके बचे कहाँ और क्या कर रहे है
दोनो जगह कर्मचारियों के घर वालों को कर्मचारी से मिलने नहीं दिया जाता
दोनो जगह कर्मचारियों के घर वालों को  अपना बचा वापिस लेजाने की कीमत वसूली जाती है
दोनो जगह कर्मचारियों के घर वालों को  अपना बचा वापिस लेने के लिए पुलिस और कोर्ट कचहरी के च्कर लगाने पड़ते है
दोनो जगह कर्मचारियों के घर वालों को इनके गुंडे परेशान करते हैं
दोनो जगह आने वाले लोग अँधा पैसा लूटा कर जाते हैपर कर्मचारी को कुछ नहीं मिलता पर वर्षो तक मानसिक और शारीरिक शोषण होता रहता है
दोनो जगह कर्मचारी धोखे से रखे जाते है
दोनो जगह कर्मचारियों को भय से भयभीत कर रखा जाता है
खाने के लिए पैसे दिए है तुम्हे  जिसके लिए उन्हे दिन रात काम करना पड़ता है
कोठे पर कोठे वाले दलाल और आसाराम  के अश्रमों में आसाराम  सारे पैसे ले जाते है
दोनो जगह करोड़ो रुपया की कमाई होती है पर कोई हिसाब सफेद में नहीं रखा जातासारा टॅक्स फ्री है
दोनो जगह  बड़े बड़े पुलिस के अधिकारीओं के पीछे से ताड़ जुड़े होते है
दोनो जगह राजनीतिक पार्टियों का संरक्षण है
दोनो जगह कितने ही कर्मचारियों को मौत के घाट उतार दिया जाता है अगर वो अपने घर वापिस जाने की बात करते हैं और उन हत्याओ का कोई लेखा झोखा नहीं होता, पर वहाँ के कर्मचारियों से विश्वास में ले कर या पुराने कर्मचारियों या करीब के लोगो से पूछने पर अनगिनत हत्याओं के मामले सामने दबी आवाज़ में खुलते है
दोनो जगह ज़हर से मार देने का उपाय पर्योग में लाया जाता है
दोनो जगह महिलाएं बिना शादी के ही माँ बन जाती हैपर दोनो जगहों पर इनके बचे कोख में ही मरवा दिए जाते है (गर्भपात), ताकि कर्मचारी काम करता रहे और धंधे को बदाता रहे
दोनो जगह पॉल खुलने और नंगे होने पर भी दोनो अपने धंधे को चलाने की कोशिश करते है
दोनो जगह जब आम आदमी जब मिल कर आवाज़ उठाते है तो  इनके धंधे बंद हो जाते है और समाज जाग जाता है
समाज अब जाग आया है

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